दर्द इंसान को तोड़ देता है… और मैं टूट चुका था
मेरा नाम सतीश है, उम्र 55 साल, और मैं वाराणसी का रहने वाला हूँ।
पिछले 4–5 सालों से मेरे घुटनों और कमर का दर्द ने मुझे जैसे कैद कर लिया था।
पहले मैं हर काम खुद करता था—लेकिन धीरे-धीरे हालत ऐसी हो गई कि
कुर्सी से उठना भी किसी सज़ा जैसा लगता था।
रात को करवट बदलते हुए आँसू निकल आते थे,
और सोचता था—क्या अब मेरी जिंदगी ऐसे ही दर्द में कटेगी?
लोग कहते हैं—बुढ़ापा दर्द लेकर आता है,
पर शायद कोई नहीं जानता कि दर्द इंसान की इज़्ज़त, हिम्मत और हँसी सब छीन लेता है…
मुझे लगता था मैं बोझ बन गया हूँ…
मेरे बच्चे मुझे उठाते-बैठाते थे और मैं अंदर-ही-अंदर टूट रहा था।
इन्हीं दिनों एक दिन मेरे बेटे ने कहा—
“पापा, एक बार तेज राहत महा संजीवनी तेल ट्राय करके देखिए… शायद आपको आराम मिले।”
मैंने हँसकर कहा—“बेटा, अब इन तेलों से क्या होगा? बहुत आज़मा चुके…”
लेकिन बेटे की आँखों की चिंता देखकर मैंने सोचा,
चलो उसके लिए एक बार कोशिश कर लेता हूँ।
मैंने इसे लगाना शुरू किया।
पहले दिन कुछ खास महसूस नहीं हुआ,
लेकिन 8वें दिन मैंने महसूस किया कि दर्द पहले जैसा नहीं रहा।
दिल में पहली बार उम्मीद की चिंगारी जली।
20 दिन पूरे होते-होते,
वो दर्द जिसने मुझे सालों से परेशान किया था,
धीरे-धीरे खत्म हो गया।
मुझे फिर से बिना सहारे चलने की ताकत मिल गई।
आज मैं अपने पैरों पर खड़ा हूँ—और यह सिर्फ़ शारीरिक नहीं,
मन की जीत भी है।
कंपनी वालों ने कहा—
“एक महीना पूरा इस्तेमाल करेंगे तो दर्द दोबारा नहीं आएगा।”
और सच कहूँ, उनकी आवाज़ में ईमानदारी महसूस हुई।
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आज मैं हर उस इंसान से कहना चाहता हूँ जो अपने दर्द से हार चुका है:
“कृपया हार मत मानो… राहत मिलती है, बस कोशिश मत छोड़ो।”
मैंने पाया है—आप भी पा सकते हैं।
तेज राहत महा संजीवनी ने सिर्फ़ मेरा दर्द कम नहीं किया—
उसने मेरी उम्मीद लौटाई, मेरी इज़्ज़त लौटाई, मेरी मुस्कान लौटाई।
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दिल से धन्यवाद
तेज राहत महा संजीवनी
जिसने मुझे फिर से जीने का
हौसला दिया।
– सतीश (55 वर्ष)
वाराणसी, उत्तर प्रदेश








